मीरा–भाईंदर महानगरपालिका में प्रशासनिक सत्ता परिवर्तन के बाद नवनिर्वाचित महापौर डिंपल मेहता ने अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक लेकर सख्त रुख अपनाया है। इस बैठक में मनपा आयुक्त राधाविनोद शर्मा, भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता सहित सभी प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में महापौर डिंपल मेहता ने अवैध निर्माण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की घोषणा करते हुए दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि किसी भी अधिकारी द्वारा अवैध निर्माण को संरक्षण या समर्थन दिया गया, तो उसके खिलाफ सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि शहर की बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त बोझ डालने और मीरा–भाईंदर की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य है।
बैठक में शहर में चल रहे अवैध निर्माणों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। महापौर ने कहा कि सरकारी भूखंडों पर कब्जे, खाली जमीनों पर झोपड़ियों का निर्माण, मरम्मत की अनुमति की आड़ में अतिरिक्त मंजिलें खड़ी करना तथा पुरानी जर्जर इमारत बताकर खाली भूखंडों पर नए भवन खड़े करना तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जैसे ही अवैध निर्माण की सूचना मिले, तत्काल मौके पर कार्रवाई की जाए। बाद में नोटिस और कागजी प्रक्रिया का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
साथ ही उन्होंने कहा की प्रत्येक विभाग अधिकारी को अपने क्षेत्र के लिए हर सप्ताह यह प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा कि वहां कोई अवैध निर्माण नहीं हो रहा है। यदि यह जानकारी गलत पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के निलंबन का प्रस्ताव सीधे आम सभा में लाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मनपा आयुक्त राधाविनोद शर्मा भी अधिकारियों को कड़ा अल्टीमेटम दे चुके हैं।
28 फरवरी को मनाई जाने वाली मीरा–भाईंदर महानगरपालिका की वर्षगांठ इस वर्ष पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में मनपा के लिपिकीय और अन्य कर्मचारियों की वर्षों से लंबित पदोन्नतियों का मुद्दा भी उठा। कई कर्मचारी पूरी सेवा अवधि एक ही पद पर कार्य करने को मजबूर हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए महापौर ने तत्काल समाधान के निर्देश दिए और कहा कि तकनीकी अड़चनों की आड़ में कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता पहले ही संकेत दे चुके हैं कि प्रशासकीय शासनकाल के दौरान लिए गए कुछ निर्णयों—जैसे सुल्तान चौक से जुड़े फैसले, चेना नदी तट परियोजना, शिवार गार्डन, सरकारी भूखंडों के आवंटन और सामुदायिक भवनों के नामकरण—की समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जा सकता है। इन मुद्दों पर पहली आम सभा में तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।












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