नवी मुंबई: इस महीने संपन्न नवी मुंबई महानगरपालिका की महासभा बैठक सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच ‘राजनीतिक अखाड़े’ में तब्दील हो गई। महासभा बैठक में भारी हंगामे, तीखी नोकझोंक और व्यक्तिगत आरोप -प्रत्यारोप के बीच माहौल इतना गरमा गया कि महापौर सुजाता पाटिल को एक्शन मोड़ में आते हुए सख्त रुख अख्तियार करते हुए पुरे सभागृह को अनुशासन का कड़ा पाठ पढ़ाया और चेतावनी दी की अगर अनुशासन का पालन नहीं हुआ तो सम्बंधित नगरसेवक को निलंबित कर दिया जायेगा।
इस दौरान महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक मंच को राजनीतिक कटाक्ष और व्यक्तिगत हमलों का अखाड़ा बनने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों को मर्यादा, जवाबदेही और संवैधानिक आचरण का पालन करने की नसीहत दी।
महापौर ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कड़े दिशा-निर्देश जारी किए. उन्होंने कहा कि, किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी या अमर्यादित राजनीतिक बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, नियमों की अवहेलना करने या सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले नगरसेवक को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी और ऐसा न करने पर संबंधित नगरसेवक को तत्काल निलंबित कर दिया जाएगा।
महापौर ने दो टूक शब्दों में साफ़ कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों को जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए चुना है, न कि हंगामा करने के लिए।
“मतभेद स्वाभाविक, पर मर्यादा अनिवार्य” : सुजाता पाटिल (महापौर)
“लोकतंत्र में विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन सदन की नियमावली और मर्यादा का पालन करना उतना ही महत्वपूर्ण है। चर्चा जनहित के मुद्दों पर होनी चाहिए ताकि शहर का विकास सुनिश्चित हो सके।”















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