ठाणे जिले की राजनीति इन दिनों एक शब्द — “नालायक” — को लेकर उफान पर है। यह शब्द एक भाषण के दौरान महाराष्ट्र के वनमंत्री गणेश नाईक द्वारा इस्तेमाल किया गया था।
दरअसल, नवी मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गणेश नाईक ने बिना किसी का नाम लिए कहा था कि —
“अगर नालायक लोगों के हाथ में नवी मुंबई महानगरपालिका की सत्ता चली गई, तो इस शहर का बर्बाद होना तय है।”
इस बयान के बाद राजनीतिक दलों में शब्दों की सियासत शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने गणेश नाईक के बयान को लेकर उन पर निशाना साधा है, जबकि भाजपा नेता और समर्थक इसे “सच्चाई का आईना” करार दे रहे हैं।
जनता दरबार में फिर गरजे गणेश नाईक
इस मुद्दे को लेकर जब ठाणे जिले के जनता दरबार में पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछा, तो गणेश नाईक ने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज़ में जवाब देते हुए आलोचकों पर ही पलटवार किया। उन्होंने आलोचकों को “नालायक” शब्द का अर्थ और इसे क्यों इस्तेमाल किया गया उसका खुलासा किया और कहा की यह बयान शहर के हितों की रक्षा की चेतावनी था, न कि किसी व्यक्ति विशेष पर प्रहार।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गणेश नाईक का दशकों से नवी मुंबई क्षेत्र में प्रभाव रहा है, ऐसे में यह बयान गणेश नाईक खेमे की संगठनात्मक पकड़ और आत्मविश्वास का संकेत माना जा रहा है।
बता दे की वन मंत्री गणेश नाईक ने कोरोना काल के दौरान भी अपने आलोचकों पर पानी चोरी, दवा चोरी, इंजेक्शन चोरी और ऑक्सीजन चोरी जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाया था। अब “नालायक” बयान के ज़रिए उन्होंने एक बार फिर से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलने से वे नहीं हिचकिचाएंगे।
भाजपा बनाम विपक्ष — बढ़ी बयानबाज़ी
भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस बयान का बचाव करते हुए कहा है कि “गणेश नाईक ने किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि नकारात्मक राजनीति कर नवी मुंबईकरों के साथ अन्याय करने वालो को नालायक कहा है।”
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद नवी मुंबई मनपा चुनाव की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। “नालायक” शब्द अब केवल बयान नहीं, बल्कि चुनावी नैरेटिव (narrative) बन गया है — जो यह तय करेगा कि जनता किसके “काबिल” नेतृत्व पर भरोसा जताती है।














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