मंत्री गणेश नाईक का मास्टरस्ट्रोक: 2,500 ठोक मानधन कर्मचारियों को स्थायी करने की घोषणा !

  • शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन समेत कई विभागों के ‘ठोक मानधन’ कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

नवी मुंबई | मोनिका भोसले

नवी मुंबई महानगरपालिका के विभिन्न विभागों में पिछले कई वर्षों से अल्प वेतन और ‘ठोक मानधन’ पर काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के वनमंत्री और कद्दावर नेता गणेश नाईक ने घोषणा की है कि मनपा के विभिन्न विभागों में वर्षो से कार्यरत इन कर्मचारियों को स्थायी करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।

श्रमिक सेना द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए गणेश नाईक ने कहा कि आगामी महासभा और स्थायी समिति की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुमत के साथ इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी और अगले 3 महीनों के भीतर इसे अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया जाएगा।

बता दें की इस निर्णय का लाभ मनपा के प्रमुख विभागों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग, उद्यान, प्रशासन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नवी मुंबई परिवहन विभाग के 2,500 कर्मचारियों को इस निर्णय का लाभ मिलेगा।

गणेश नाईक ने कहा, इस निर्णय से लगभग 2,500 कर्मचारियों को सीधा लाभ होगा।हालांकि, इस कदम से महानगरपालिका की तिजोरी पर सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा, लेकिन कर्मचारियों के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें वित्तीय स्थिरता देने के लिए यह निर्णय आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि स्थायी होने के बाद कर्मचारी जनता को और भी बेहतर सेवाएं प्रदान करेंगे।

इस महत्वपूर्ण बैठक में गणेश नाईक के साथ श्रमिक सेना के अध्यक्ष व पूर्व सांसद संजीव नाईक, पूर्व महापौर तथा सभागृह नेता सागर नाईक, श्रमिक सेना के महासचिव चरण जाधव, विजय साळे, अध्यक्ष राजूसिंग चव्हाण, उपाध्यक्ष सुनील गावित और महासचिव राम चव्हाण सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

इस दौरान गणेश नाईक ने यह भी आश्वासन दिया कि न केवल ठोक मानधन कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा, बल्कि मनपा के नियमित कर्मचारियों, परिवहन सेवा के कर्मियों और आशा वर्कर्स के वेतन में वृद्धि को लेकर भी सकारात्मक निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।

“ये कर्मचारी पिछले 12-15 वर्षों से नवी मुंबई के विकास में अपना पसीना बहा रहे हैं। उनके भविष्य को सुरक्षित करना और उन्हें सम्मान देना हमारी जिम्मेदारी है।”
— गणेश नाईक, वनमंत्री

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