गणेश नाईक के ‘विजन’ से वन विभाग ने रचा इतिहास; ई-गव्हर्नन्स में महाराष्ट्र में पाया दूसरा स्थान

महाराष्ट्र के राजनीतिक क्षितिज पर अपनी कार्यकुशलता, दूरदृस्टि के लिए प्रसिद्ध दिग्गज नेता और राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक के नेतृत्व में वन विभाग ने सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य सरकार के ‘150 दिवसीय ई-गव्हर्नन्स सुधार कार्यक्रम’ में वन विभाग ने पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त कर अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता दिखाई है। 200 में से 171.5 अंकों के साथ वन विभाग डिजिटल गवर्नेंस के मामले में राज्य के सबसे अग्रणी विभागों में शुमार हो गया है।

सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर को इस गौरवशाली पुरस्कार से नवाजा गया। इस अवसर पर म्हैसकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय वन मंत्री गणेश नाईक के कुशल मार्गदर्शन और उनके प्रेरणादायी नेतृत्व को जाता है।

बता दे यह सफलता केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि गणेश नाईक के मार्गदर्शन में जन-सरोकार और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए – उनके मार्गदर्शन में विभाग ने फाइलों के बोझ को कम कर ‘ई-ऑफिस’ के जरिए कामकाज को गति प्रदान की. जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और कार्यक्षमता बढ़ी है, साथ ही

  • AI और ड्रोन का उपयोग: वनाग्नि (जंगलों की आग) की पूर्व सूचना और वन्यजीवों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभावी इस्तेमाल।
  • पारदर्शी प्रशासन: ई-ऑफिस प्रणाली के जरिए फाइलों की मंजूरी के चरणों को कम कर निर्णय प्रक्रिया को तेज किया गया।
  • नागरिक सेवा: ई-नीलामी और सफारी बुकिंग जैसी सेवाओं को व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से सीधे जनता तक पहुँचाया गया।

साथ ही, 40 से अधिक विशेष लेयर्स वाला एक एकीकृत जीआईएस जियो-पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल ने वैज्ञानिक वन प्रबंधन और नियोजन को अधिक सुलभ बना दिया है और यह ‘पीएम गतिशक्ति’ योजना के अनुरूप है।

इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशिष शेलार, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

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