सावधान! 01 अप्रैल से बदल गया कचरा फेंकने का तरीका; 2 नहीं, अब 4 डस्टबिन होंगे अनिवार्य

विशेष संवाददाता, मुंबई | 01 अप्रैल, 2026

यदि आप अभी भी अपने घर का सारा कचरा एक ही डिब्बे में डाल रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। 1 अप्रैल 2026 से देश भर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026’ (Solid Waste Management Rules 2026) लागू हो गया है। नए नियमों के मुताबिक, अब हर घर, दुकान और संस्थान को अपना कूड़ा दो नहीं बल्कि चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर देना होगा।

यदि कचरा नियमों के अनुसार अलग-अलग नहीं पाया गया, तो सफाई कर्मचारी उसे उठाने से मना कर देंगे और संबंधित व्यक्ति पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

कचरे का ‘कलर कोड’: जानें किस डिब्बे में क्या जाएगा?
प्रदूषण कम करने और कचरे के सही निपटान के लिए सरकार ने चार रंगों के डस्टबिन निर्धारित किए हैं :
➤ हरा डस्टबिन (गीला कचरा): इसमें केवल रसोई का कचरा जैसे सब्जियों के छिलके, बचा हुआ भोजन और फल डाले जाएंगे।

➤नीला डस्टबिन (सूखा कचरा): इसमें प्लास्टिक, कागज, कांच की बोतलें, गत्ता और धातु का सामान रखा जाएगा।

➤ लाल डस्टबिन (सेनेटरी वेस्ट): इसमें इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी नैपकिन और मेडिकल पट्टियाँ डालनी होंगी।

➤काला डस्टबिन (खतरनाक वेस्ट): इसमें ई-वेस्ट (पुरानी बैटरी, तार), एक्सपायर्ड दवाइयां, पेंट के डिब्बे और सीएफएल बल्ब रखे जाएंगे।

सरकार ने इस बार नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए ‘पॉल्यूटर पेज़’ (Polluter Pays) का सिद्धांत अपनाया है। इसका सीधा मतलब है— “जो गंदगी फैलाएगा, वही भुगतान करेगा।” इसकी निगरानी के लिए केंद्र प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड ने एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है, जिससे कचरा प्रबंधन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी।

➤ बल्क जनरेटर: होटल, अस्पताल और बड़े अपार्टमेंट्स (जहाँ रोजाना 100 किलो से अधिक कचरा निकलता है) को अपने परिसर में ही गीले कचरे के निपटान की व्यवस्था करनी होगी।

इस बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए मनपा की कचरा उठाने वाली गाड़ियों को भी मॉडिफाई किये जाने के निर्देश दिए गए है। अब गाड़ियों में चार अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए जायेंगे, ताकि अलग-अलग रंगों के डस्टबिन का कचरा आपस में न मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से लैंडफिल साइट्स पर कचरे का बोझ कम होगा और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया तेज होगी।

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