केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया है कि मत्स्य पालन क्षेत्र भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और आजीविका बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह क्षेत्र 90 लाख से अधिक मछुआरे परिवारों को सहायता प्रदान करता है। इनमें मुख्य रूप से छोटे, और पारंपरिक मछुआरे शामिल हैं।
कैमरून में विश्व व्यापार संगठन के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए श्री गोयल ने मत्स्य पालन के प्रति भारत के संतुलित और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। विश्व व्यापार संगठन का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन, 26 मार्च से शुरू हुआ था और कल समाप्त हो गया।
विश्व व्यापार संगठन सम्मेलन: पीयूष गोयल ने बुलंद की 90 लाख मछुआरा परिवारों की आवाज
न्यूज़ डेस्क
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक मंच पर भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की खाद्य सुरक्षा और लाखों लोगों की आजीविका का मुख्य आधार है। कैमरून में आयोजित विश्व व्यापार संगठन के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए उन्होंने छोटे और पारंपरिक मछुआरों के हितों की पुरजोर वकालत की।
गोयल ने सम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया कि भारत में मत्स्य पालन केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि एक जीवन रेखा है। यह क्षेत्र 90 लाख से अधिक मछुआरा परिवारों को सहायता प्रदान करता है, जिनमें मुख्य रूप से छोटे, पारंपरिक और निर्वाह के लिए मछली पकड़ने वाले समुदाय शामिल हैं।
उन्होंने आगे बताया कि भारत द्वारा दी जाने वाली मत्स्य सब्सिडी दुनिया में सबसे कम (प्रति परिवार मात्र $15 वार्षिक) में से एक है, जबकि विकसित देश हजारों डॉलर की सब्सिडी देते हैं।
पियूष गोयल ने तर्क दिया कि समुद्री संसाधनों के दोहन और ‘ओवरफिशिंग’ के लिए बड़े औद्योगिक जहाज और विकसित देशों की भारी सब्सिडी जिम्मेदार है, न कि विकासशील देशों के छोटे मछुआरे। वही इस दौरान उन्होंने बताया की भारत ने विकासशील देशों के लिए मत्स्य पालन सब्सिडी में बदलाव के लिए 25 वर्षों की संक्रमण अवधि की मांग की।
मंत्री ने भारत के वार्षिक फिशिंग बैन (मछली पकड़ने पर वार्षिक प्रतिबंध) जैसे ऐतिहासिक संरक्षण प्रयासों का भी उल्लेख किया। पीयूष गोयल ने वैश्विक नेताओं को याद दिलाया कि भविष्य के किसी भी व्यापारिक समझौते में पर्यावरण सुरक्षा और आजीविका सुरक्षा के बीच संतुलन होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “भारत एक औद्योगिक मछली पकड़ने वाला राष्ट्र नहीं है। हमारे लिए यह मुद्दा खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों के पोषण से जुड़ा है।”
सम्मेलन के समापन पर यह स्पष्ट हुआ कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को और अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है।















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