मानव जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता का सबसे सरल मार्ग मंत्रजप और ध्यान है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पहले बताया था कि मन स्थिर हो जाए तो जीवन में आने वाली हर चुनौती छोटी लगने लगती है। आज भी यही सत्य उतना ही प्रभावी है।
मंत्रजप का अर्थ केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि अपनी चेतना को दिव्यता से जोड़ने का माध्यम है। जब हम “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ गं गणपतये नमः” या “ॐ” जैसे पवित्र मंत्रों का जप करते हैं, तब मन की अशांति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और भीतर एक शांत प्रकाश फैलने लगता है।
दैनिक जीवन की व्यस्तता में कुछ मिनटों का ध्यान भी मन को पुनर्जीवित करने की शक्ति रखता है। ध्यान के दौरान श्वास पर ध्यान केंद्रित करने से मन की गति धीमी होती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है।
आध्यात्मिक ग्रंथ बताते हैं कि,
“जैसा मन, वैसा जीवन।”
इसलिए मन को सकारात्मक बनाने के लिए मंत्रजप और ध्यान से बेहतर साधना कोई नहीं।
आज का संदेश यही है—
अपने दिन की शुरुआत और अंत कुछ मिनटों की साधना से करें।
ईश्वर की कृपा, शांति और दिव्य ऊर्जा स्वतः आपके जीवन में प्रवाहित होने लगेगी।















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