पारसी अग्नि मंदिरों में Atash Behram की दिव्यता

उदवाड़ा और मुंबई जैसे स्थानों पर स्थित पारसी अग्नि मंदिर, विशेष रूप से “आतश बेहरम”, पारसी समुदाय के लिए केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र के रूप में देखे जाते हैं। “आतश बेहरम” का अर्थ है – ‘विजयी अग्नि’, जो ज़रथुस्त्र धर्म के अनुयायियों के अनुसार, पवित्रता और दिव्यता का सर्वोच्च प्रतीक है। इन मंदिरों में जलाई गई अग्नि को वर्षों से अखंड रखा गया है, जिसे प्रतिष्ठित बनाने के लिए कई अलग-अलग स्रोतों से अग्नि का संयोजन किया जाता है – जैसे बिजली की चिंगारी, श्मशान की अग्नि, किसान की अग्नि, और कारीगरों की अग्नि।

पारसी परंपरा में अग्नि को सत्य, धर्म और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। पहले के समय में जब अंबरक (ओड) की लकड़ियाँ अग्निदेव को अर्पित की जाती थीं, तो पूरे क्षेत्र में एक दिव्य सुगंध फैल जाया करती थी। उस वातावरण में आध्यात्मिक चेतना और सामूहिक भक्ति का स्वरूप देखा जा सकता था। अग्नि मंदिर न केवल धार्मिक रीतियों का केंद्र हैं, बल्कि पारसी संस्कृति, संगीत, स्थापत्य और विरासत का भी जीवंत संग्रह हैं।

90 वर्ष से अधिक उम्र के बूमनजी कोहिनूर जैसे वरिष्ठ पारसी श्रद्धालु बताते हैं कि इन मंदिरों में समय बिताने से उन्हें गहन आत्मिक शांति और सामूहिक जुड़ाव की अनुभूति होती है। वह कहते हैं कि “जब हम अग्नि के सामने बैठते हैं, तो ऐसा लगता है मानो आत्मा से कोई संवाद हो रहा हो।” उनके अनुसार, आधुनिक जीवन की भागदौड़ में अग्नि मंदिर एक ऐसा स्थान है, जहाँ शांति, चिंतन और परंपरा एक साथ जीवंत हो उठते हैं। ऐसे धार्मिक स्थल न केवल आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि समाज के लिए सांस्कृतिक स्मृति के संरक्षक भी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *