पंडित कमलेश कुमार शर्मा की पहल ‘Pooja Hetu’ ने पारंपरिक यज्ञों को पर्यावरण के अनुकूल, समावेशी और सरल रूप में प्रस्तुत किया है। अप्रैल 2024 में शुरू हुए 108 कुंडों के इस यज्ञ का समापन अप्रैल 2025 में हुआ। इसमें पूजा-सामग्री स्थायी, हस्तनिर्मित और शास्त्रानुकूल थी।
इस पहल का उद्देश्य था—कास्ट, धर्म, लिंग जैसी सीमाओं को पार कर एकता और आध्यात्मिकता का संदेश देना। यह आधुनिक यज्ञ न केवल रीतियों का पुनरुत्थान करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर वेदिक ज्ञान और स्वास्थ्य‑समृद्ध जीवनशैली को आगे बढ़ावा देता है।
‘Pooja Hetu’ की यह पहल केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं रही, बल्कि यह भारत के वैदिक ज्ञान को वर्तमान समय की जरूरतों के साथ जोड़ने का सार्थक प्रयास बन गई। पंडित कमलेश कुमार शर्मा द्वारा संपन्न इस नवाचार में यज्ञों को पर्यावरण-सम्मत बनाने के लिए प्लास्टिक-मुक्त सामग्री, जैविक घी, गोबर से बने हवन कुंड और शुद्ध देसी जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया गया। यह आधुनिक और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली पहल थी, जिसने लोगों में प्रकृति और आध्यात्मिकता के प्रति संवेदनशीलता को फिर से जाग्रत किया।
यज्ञ स्थलों पर दिव्य ध्वनि, वैदिक मंत्र और सामूहिक ध्यान से एक सकारात्मक कंपन का वातावरण निर्मित हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। युवाओं, महिलाओं, और LGBTQ+ समुदाय सहित विविध वर्गों की भागीदारी ने इसे एक समावेशी आंदोलन का रूप दिया। ‘Pooja Hetu’ के आयोजनों में स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक संगीत और आयुर्वेदिक खाद्य सामग्री का भी समावेश रहा, जिससे यह आयोजन सांस्कृतिक उत्थान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का माध्यम भी बना।
इस पूरे वर्षव्यापी आयोजन के अंत में पंडित शर्मा ने बताया कि ‘Pooja Hetu’ अब एक स्थायी अभियान के रूप में देश के अन्य हिस्सों में भी फैलाया जाएगा। उनका उद्देश्य है—प्राचीन वैदिक परंपराओं को नवाचार के साथ जोड़ते हुए उन्हें जन-जन तक पहुँचाना, ताकि आत्मिक और सामाजिक स्वास्थ्य को एक साथ सशक्त किया जा सके।















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