भारत का वास्तु–फेंग Shui संगम – ऊर्जा के नए आयाम

प्रो. आनंद सोनी के अनुसार, हिमालय की दिशा एवं ढँके जलों ने भारत को एक प्राकृतिक ऊर्जा केंद्र बना दिया है। वास्तु शास्त्र में पूर्वोत्तर दिशा को “ईशान” कहा जाता है—जहाँ दिव्यता और शुद्धता का निवास माना गया है। वहीं पश्चिम-दक्षिण की दिशा स्थायित्व का पर्याय है, जिसे हिंद महासागर के साथ जोड़ा गया है। फेंग Shui दृष्टिकोण में देश की आकृति एक “ड्रैगन आकृति” जैसी प्रतीत होती है, जो शुभ ऊर्जा (Chi) बहाव को संजीवनी देता है।

यह संतुलन—पर्वत और महासागर के बीच—भारत को आध्यात्मिक नेतृत्व, नवाचार और आंतरिक उन्नति का केंद्र बनाता है। प्रो. सोनी का मानना है कि इस प्राकृतिक ऊर्जा को समझकर व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए, कई आध्यात्मिक केंद्रों और मंदिरों की स्थापना भी विशेष दिशाओं और ऊर्जाओं को केंद्र में रखकर की गई है। उदाहरणस्वरूप, वाराणसी, तिरुपति, और अमरनाथ जैसे तीर्थस्थलों की भौगोलिक स्थिति केवल धार्मिक महत्व नहीं रखती, बल्कि ये ऊर्जाओं के ऐसे संगम पर बसे हैं जहाँ प्राकृतिक कंपन और आध्यात्मिक एकाग्रता का अनूठा सामंजस्य होता है। प्रो. सोनी के अनुसार, यदि इन ऊर्जा-केन्द्रों को आधुनिक वास्तु और विज्ञान के साथ जोड़ा जाए, तो भारत वैश्विक स्तर पर ‘आध्यात्मिक इंजीनियरिंग’ का उदाहरण बन सकता है—जहाँ आध्यात्मिकता, विज्ञान और जीवनशैली एक-दूसरे में समरस हो जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *