वन्यजीवों पर नज़र रखने के लिए 1,000 गांवों में स्थापित होगी AI अलर्ट प्रणाली: वन मंत्री गणेश नाईक

वन्यजीवों पर नज़र रखने के लिए 1,000 गांवों में स्थापित होगी AI अलर्ट प्रणाली: वन मंत्री गणेश नाईक
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 260 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी
  • राज्य में बनेंगे अत्याधुनिक कंट्रोल रूम, रेस्क्यू सेंटर और 10 ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर
  • ग्रामीणों की भागीदारी के साथ गठित होंगी दो हजार ‘प्राइमरी रिस्पॉन्स टीम’

राज्य में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और जनहानि को टालने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य वन्यजीव मंडल की स्थायी समिति की बैठक में राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक ने लगभग 260 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पहले चरण में राज्य के 1,000 संवेदनशील गांवों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अलर्ट प्रणाली शुरू की जाएगी। इसके साथ ही 10 स्थानों पर अत्याधुनिक कंट्रोल रूम, दो नए रेस्क्यू सेंटर और दस ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

मंत्रालय में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में विधायक समीर मेघे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वनबल प्रमुख) श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एम. श्रीनिवास रेड्डी और उप सचिव निकिता पांडे सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे। बैठक के दौरान वन मंत्री नाईक ने अधिकारियों को इन उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के कड़े निर्देश दिए।

➤ पुलिस की तर्ज पर काम करेंगे 10 हाईटेक कंट्रोल रूम
वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि मानव-वन्यप्राणी टकराव को रोकने के लिए पुलिस विभाग की तर्ज पर वन विभाग भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में 10 अत्याधुनिक डिजिटल कंट्रोल रूम स्थापित करेगा। इन कंट्रोल रूम के जरिए वन विभाग के वाहनों, संसाधनों और गश्ती दलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में वन्यजीव के आबादी वाले इलाके में आने की खबर मिलती है, तो यह कंट्रोल रूम तुरंत सक्रिय होकर स्थानीय लोगों को अलर्ट करेगा और रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजेगा।

➤ AI तकनीक और स्थानीय नागरिकों का मिलेगा साथ
जंगलों से सटे गांवों में वन्यजीवों की मौजूदगी का पहले से पता लगाने के लिए अभी तक कुछ क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर AI आधारित अलर्ट सिस्टम चलाया जा रहा था। इसके सफल परिणामों को देखते हुए अब इसे 1,000 गांवों में विस्तार दिया जा रहा है। तकनीक के साथ-साथ जनभागीदारी बढ़ाने के लिए वन क्षेत्रों के गांवों में 2,000 ‘प्राथमिक रिस्पॉन्स टीम’ का गठन किया जाएगा, जिनमें स्थानीय ग्रामीण शामिल होंगे। इसके अलावा वन्यजीवों के तुरंत रेस्क्यू के लिए 20 ‘रैपिड रेस्क्यू टीम’ भी मुस्तैद की जाएंगी।

➤ किसानों को राहत: फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जानवरों के लिए विशेष दल

किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए वन मंत्री ने घोषणा की कि फसलों को बर्बाद करने वाले हिरण, बंदर और जंगली सूअरों को पकड़ने के लिए दो विशेष ‘मोबाइल स्कॉड’ बनाए जाएंगे। ये दल आधुनिक उपकरणों से लैस होंगे और पकड़े गए जानवरों को सुरक्षित रूप से घने जंगलों में छोड़ेंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य में बंदरों और जंगली सूअरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए दो स्थानों पर नसबंदी केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

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