मोनिका भोसले
➤ ‘योग रहस्य’ वेलनेस स्टार्टअप का शुभारंभ
➤ ‘स्वतः आधी, नंतर जग’ नई पुस्तक का शानदार आगाज़
“पारिवारिक बंदिशों और जिम्मेदारियों से आगे बढ़ना सीखो,
खोई हुई पहचान को अब फिर से सच करना सीखो।
‘स्वतः आधी, नंतर जग’ का संदेश अब मन में लिखना है,
‘योग रहस्य’ से जुड़कर अपनी तकदीर अब खुद बदलना है।”
हर महिला के भीतर एक सपना होता है, बस उसे उसकी शक्ति का एहसास कराने वाले एक सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। इसी आत्म-विश्वास के बल पर नवी मुंबई की काजल नाईक ने एक साधारण गृहणी से सफल संस्थापिका और लेखिका तक का प्रेरणादायी सफर तय किया है। उनका यह सफर साबित करता है कि यदि प्रबल इच्छाशक्ति हो, तो जीवन में बदलाव की शुरुआत किसी भी पड़ाव पर की जा सकती है। काजल नाईक ने न केवल अपने जीवन को एक नई दिशा दी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर और स्वस्थ बनाने के लिए ‘योग’ व अपनी ‘लेखनी’ को एक सशक्त माध्यम बनाया है।
➤ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर ‘योग रहस्य’ स्टार्टअप और पुस्तक का विमोचन
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में नवी मुंबई के सानपाड़ा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में काजल नाईक ने अपने मार्गदर्शकों , परिवारजनों एवं शुभचिंतकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपने सपनों के प्रोजेक्ट— वेलनेस स्टार्टअप ‘योग रहस्य’ का आधिकारिक शुभारंभ किया। इसी गरिमामयी अवसर पर उनकी स्वरचित पुस्तक ‘स्वतः आधी, नंतर जग’ (She First, Then the World) का भी विमोचन किया गया।
इस उद्घाटन समारोह की सबसे खास और आत्मीय बात यह रही कि काजल नाईक के अपने ही परिवार की महिला सदस्यों के हाथों दीप प्रज्वलन कर इस नए सफर का श्रीगणेश किया गया, जिसने पूरे माहौल को अत्यंत प्रेरणादायी बना दिया।
एक सच्चे मेंटर की भूमिका निभाते हुए काजल नाईक ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को योग का लाइव प्रशिक्षण दिया। महिलाओं के भारी उत्साह और ऊर्जा के बीच ‘योग रहस्य’ की आधिकारिक शुरुआत हुई। इस पहल के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को खुद को प्राथमिकता देने, आत्म-जागरूकता बढ़ाने और शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
➤ अनुभवों का संवेदनशीलता से चित्रण:
अपनी पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए काजल नाईक ने अपने व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि परिवार की जिम्मेदारियों के बीच महिलाओं का अपनी पहचान खो देना एक कड़वा सच है, जिसे बदलना बेहद जरूरी है।
➤ “यह पुस्तक महिलाओं को खुद से मिलवाएगी”
अपनी पुस्तक के बारे में बात करते हुए काजल नाईक भावुक और आत्मीय नजर आईं। उन्होंने कहा:
“इस पुस्तक में मैंने सिर्फ अपने अनुभव नहीं, बल्कि अपने आसपास की अनेक महिलाओं के संघर्षों, उनकी भावनाओं और जीवन-अनुभवों को संवेदनशीलता से शब्दबद्ध किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह पुस्तक आज सही मायनों में महिलाओं को खुद से खुद का परिचय करवाएगी और उन्हें जीवन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की नई राह प्रशस्त करेगी।”
➤ भविष्य का विजन: ‘योग रहस्य’ एक मिशन है
काजल नाईक ने अपने भविष्य के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘योग रहस्य’ केवल एक नाम या स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी मिशन है। उनका लक्ष्य समाज की प्रत्येक महिला को इस पहल से जोड़ना है, ताकि वे अपने भीतर छिपी असीम शक्ति को पहचान सकें और एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर व संतुलित जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।
काजल नाईक ने अपने इस साहसिक और अद्वितीय कदम से समाज के सामने यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और न ही अपनी पहचान बनाने की कोई सीमा। यदि इरादा पक्का और उद्देश्य स्पष्ट हो, तो घर संभालने वाले हाथ समाज को दिशा देने वाली कलम और संस्था भी संभाल सकते हैं। उनका यह सफर आज देश की हजारों महिलाओं के जीवन में प्रेरणा की एक नई रोशनी जगा रहा है।













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