- कैटरिंग एसोसिएशन ने उठाए नीति पर सवाल, ब्रांडेड कंपनियों को फायदा पहुंचाने का लगाया आरोप
- मेन्यू में शामिल होंगे कुछ नए पकवान, जूस और सोडा के दामों में कोई बदलाव नहीं
मुंबई प्रतिनिधि:
लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों से सफर करने वाले आम रेल यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। मध्य रेलवे प्रशासन ने अपने स्टेशनों पर बिकने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। आगामी 1 जून से नई दरें प्रभावी हो जाएंगी। इस बदलाव के तहत मुंबईकरों का पसंदीदा स्नैक ‘वडा-पाव’ अब 13 रुपये के बजाय 20 रुपये में मिलेगा, जबकि समोसे की कीमत भी 12 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये कर दी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जूस और सोडा की पुरानी कीमतों में कोई फेरबदल नहीं किया गया है।
➤ पश्चिम रेलवे की तर्ज पर मध्य रेलवे का फैसला
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले साल 2025 में पश्चिम रेलवे ने अपने स्टेशनों पर खान-पान की दरों में संशोधन किया था, जबकि उससे पहले 2021 में कीमतें बदली गई थीं। इसी को आधार बनाते हुए अब मध्य रेलवे ने भी कीमतों को बाजार के अनुकूल करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही कुछ खाद्य सामग्रियों की मात्रा में भी बदलाव की योजना है। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को नए विकल्प देने के लिए अब मेन्यू में सूप, डोसा, नूडल्स, और क्रीम डोनट जैसे नए व्यंजनों को भी जोड़ा जा रहा है।
➤ लोकल बनाम ब्रांडेड: कैटरिंग एसोसिएशन ने जताई चिंता
रेलवे के इस फैसले पर कैटरिंग एसोसिएशन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि पहले पश्चिम रेलवे और अब मध्य रेलवे ने कुछ चुनिंदा ब्रांडेड कंपनियों को अनुचित लाभ देने के लिए स्टेशनों पर मिलने वाली स्थानीय और खुली वस्तुएं जैसे कि मिल्क शेक, चना, मूंगफली और चिक्की की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
एसोसिएशन का कहना है कि ये ब्रांडेड उत्पाद स्थानीय लूज सामानों की तुलना में दो से तीन गुना तक महंगे होते हैं, और इनकी पैकेजिंग व गुणवत्ता पर भी अक्सर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा नीतिगत पत्रों में ब्रांडेड पैकेट बंद सामानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यदि यही ट्रेंड रहा तो भविष्य में अन्य खाद्य पदार्थों पर भी ऐसी ही नीतियां थोप दी जाएंगी, जिसका सीधा नुकसान देश के उन 40 फीसदी से अधिक आम और गरीब यात्रियों को उठाना पड़ेगा जो किफायती खान-पान पर निर्भर हैं।












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