लोक कल्याण को समर्पित सफर: रामशेठ ठाकुर

संपादकीय :मोनिका भोसले

राजनीति और समाज सेवा में जब ‘लोक’ शब्द केंद्र में आता है, तो वह केवल एक पद या उपाधि नहीं रह जाता, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाता है। पूर्व सांसद रामशेठ ठाकुर ने अपने जीवन के 75 वर्ष पूरे कर इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। उनका यह अमृत महोत्सव केवल एक व्यक्ति के जीवन का सफरनामा नहीं है, बल्कि पिछले पांच दशकों की वह सामाजिक और वैचारिक यात्रा है जिसने कोंकण और विशेषकर पनवेल-नवी मुंबई क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने को एक नई मजबूती दी है। समाज ने उन्हें जो ‘लोकमान्य लोकनेता’ की उपाधि दी है, वह किसी राजनीतिक प्रभाव का परिणाम नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में निरंतर खड़े रहने से उपजा एक स्वाभाविक सम्मान है।

रामशेठ ठाकुर के समूचे जीवन और कार्यशैली का यदि सूक्ष्म विश्लेषण किया जाए, तो उसमें दानशीलता, सादगी और अटूट मानवीय दृष्टिकोण सबसे प्रमुख नजर आते हैं। पिछले पांच दशकों से अधिक समय से उन्होंने सामाजिक, शैक्षणिक, चिकित्सा, सांस्कृतिक, कला, खेल और जनहित के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करके जनता के दिलों में एक अमिट स्थान बनाया है। जरूरतमंदों, वंचितों और मेहनतकश वर्गों को सहारा देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज के विकास के लिए उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायी और अनुकरणीय माना जाता है।

आज के दौर में जहां सत्ता और आर्थिक शक्ति को अक्सर व्यक्तिगत प्रभाव बढ़ाने का माध्यम मान लिया जाता है, वहीं रामशेठ ठाकुर ने इसे लोक कल्याण का जरिया बनाया। ‘रयत शिक्षण संस्था’ और ‘जनार्दन भगत शिक्षण प्रसारक संस्था’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो अलख जगाई है, उसने वंचित और ग्रामीण तबके के हजारों युवाओं के भविष्य को संवारा है। शिक्षा को अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाना ही किसी भी समाज के निर्माण की पहली सीढ़ी होती है, और इस कसौटी पर उनका योगदान अद्वितीय रहा है।

“हमसे जितनी मदद हो सके उतनी करनी चाहिए” — यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि रामशेठ ठाकुर के जीवन का मूलमंत्र है, जिसने जाति, धर्म और दलीय राजनीति से ऊपर उठकर केवल मानवता को अपना धर्म माना।

एक सच्चे जननेता की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने पीछे कैसा वैचारिक उत्तराधिकार छोड़ रहा है। रामशेठ ठाकुर ने अपनी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा से नेतृत्व की एक ऐसी नई पीढ़ी तैयार की है जो उन्हीं के पदचिह्नों पर चलने का प्रयास कर रही है।

75 वर्ष की इस गौरवशाली यात्रा के पड़ाव पर ‘लोकमान्य लोकनेता’ रामशेठ ठाकुर का यह जीवन सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता रहेगा।

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