भारतीय रिज़र्व बैंक 13 जून को ₹5,000 करोड़ मूल्य के Sovereign Green Bonds (SGrBs) का दूसरा दौर जारी करेगा । ये ग्रीन बॉण्ड्स पर्यावरण-संवर्धन योजनाओं के लिए वित्त जुटाने का जरिया हैं। इससे हरित ऊर्जा, जल संरक्षण और स्वच्छ वातावरण से जुड़े सरकारी परियोजनाओं को सहायता मिलेगी और निवेशकों को स्थिर सामाजिक-पर्यावरण निवेश का अवसर मिलेगा ।
इस पहल का उद्देश्य भारत को 2070 तक “नेट-ज़ीरो” कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाना है। ग्रीन बॉन्ड्स से प्राप्त धनराशि का उपयोग मुख्यतः सौर ऊर्जा परियोजनाओं, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना, जलवायु-प्रतिकूल कृषि योजनाओं और जल पुनर्चक्रण जैसे सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि देश की हरित अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बताया कि इन बॉन्ड्स की मांग पिछले दौर में काफी उत्साहजनक रही थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय और वैश्विक निवेशकों का रुझान अब पर्यावरण-संवेदनशील निवेशों की ओर बढ़ रहा है। सरकार की मंशा है कि आगामी वर्षों में ग्रीन फाइनेंस को एक स्थायी निवेश विकल्प के रूप में स्थापित किया जाए। इसके माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने पर्यावरणीय वचनों को मजबूती से प्रस्तुत कर सकेगा और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वैश्विक सहयोग को भी आकर्षित करेगा।















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