12 जून को एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान AI‑171 (बोइंग 787‑8) जो अहमदाबाद से लंदन गेटविक जा रही थी, टेकऑफ़ के कुछ ही मिनटों बाद तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 241 यात्री और 24 चालक दल के सदस्य मारे गए। इसके अलावा, ग्राउंड पर मौजूद कई लोग भी इस हादसे की चपेट में आए। चश्मदीदों के अनुसार, विमान में अचानक आग लगने के बाद वह तेज़ी से नीचे गिरा और रिहायशी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है और अब इसकी जांच यूके, यूएस, बोइंग, और GE एयरस्पेस की विशेषज्ञ टीमें कर रही हैं। एकमात्र ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश इस हादसे में चमत्कारिक रूप से बच गए। एयर इंडिया और टाटा समूह ने प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹1 करोड़ की सहायता देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं घटनास्थल का दौरा कर शोक व्यक्त किया और इस त्रासदी को “विनाश की सजीव तस्वीर” बताया। यह हादसा न केवल मानव क्षति के कारण, बल्कि भारत में एविएशन सुरक्षा पर उठे सवालों के चलते भी ऐतिहासिक और चिंताजनक माना जा रहा है।
इस हादसे के बाद देशभर में विमानन सुरक्षा को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया और अन्य प्रमुख विमान कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी सुरक्षा जांच प्रणाली की तुरंत समीक्षा करें और ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाएं। बोइंग 787‑8 विमान के पूरे बेड़े की विस्तृत तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। विमान यात्रियों के परिवारों के लिए हेल्पलाइन और काउंसलिंग सेंटर खोले गए हैं ताकि वे मानसिक और भावनात्मक सहयोग प्राप्त कर सकें। संसद में भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया है, और विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। यह घटना भारत की विमानन नीति, रखरखाव प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र पर पुनर्विचार का अवसर बन गई है।















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