इज़राइल ने ईरान के परमाणु-सैन्य ठिकानों पर बमबारी की, वैश्विक प्रतिक्रिया तेज

13 जून को इज़राइल ने ईरान के परमाणु संयंत्र, मिसाइल निर्माण स्थल और सैन्य कमांडरों को समर्थन देने वाले उच्चस्तरीय अतिवादी वैज्ञानिकों को लक्षित कर बड़ा सैन्य अभियान चलाया । इस हमले को “Operation Rising Lion” नाम दिया गया, जिसमें तोपखाने, ड्रोन और सैटेलाइट हमले शामिल थे। ईरानी अधिकारियों ने इसे युद्ध की घोषणा करार दिया और जवाबी कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी । वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया मिलीजुली रही—जबकि अमेरिका ने स्पष्ट किया कि इसमें उसकी भागीदारी नहीं है, संयुक्त राष्ट्र समेत यूरोपीय और अरब देशों ने तीखी आलोचना की और संयम बरतने का आह्वान किया ।

वित्तीय बाजारों में इस संकट का असर तेजी से दिखा—तेल की कीमत ब्रेंट क्रूड $78.50 प्रति बैरल तक पहुंच गई, और निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों जैसे स्विस फ़्रैंक और सोने की ओर पलायन करने लगे । व्यापार मार्गों, विशेषकर हौर्मुज़ जलडमरूमध्य, की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ प्रबल हो गईं। वैश्विक अर्थव्यवस्था और अर्थनीति पर इस घटना का गहरा प्रभाव होने की आशंका जताई जा रही है।

ईरान की संसद में इस हमले के विरोध में आपात बैठक बुलाई गई, जहाँ सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने इसे “राष्ट्रीय अस्मिता पर हमला” करार दिया और कहा कि “हम इस अपमानजनक कार्रवाई का दोगुना उत्तर देंगे”। वहीं, इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दावा किया कि “यह हमला आत्मरक्षा के लिए आवश्यक था और क्षेत्रीय स्थिरता को सुरक्षित रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है”। इस घटनाक्रम से परमाणु अप्रसार संधियों की वैधता पर भी बहस छिड़ गई है, और पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका गहराती जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि टकराव बढ़ा, तो यह वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

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