कीव/ब्रुसेल्स | 25 जुलाई 2025:
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध एक बार फिर तीव्र होता नजर आ रहा है। रूसी सेना ने खारकीव और डोनेत्स्क क्षेत्रों में बीते 48 घंटों के भीतर भारी गोलाबारी और मिसाइल हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें अब तक 20 से अधिक नागरिकों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की सूचना है। यूक्रेनी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई में कई रूसी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है।
➡️ खारकीव में स्थिति गंभीर:
यूक्रेन का दूसरा सबसे बड़ा शहर खारकीव रूसी हमलों का प्रमुख निशाना बना हुआ है। शहर के आवासीय इलाकों, स्कूलों और एक बिजली संयंत्र को निशाना बनाया गया। स्थानीय प्रशासन ने कई इलाकों में आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया है और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
➡️ डोनेत्स्क में मोर्चा फिर गर्म:
डोनेत्स्क में रूस समर्थित अलगाववादी पहले से ही सक्रिय हैं, लेकिन अब रूस की सेना ने भारी बख्तरबंद वाहनों और लंबी दूरी की तोपों से हमले तेज कर दिए हैं। यूक्रेनी बलों के अनुसार, बीते सप्ताह में ही इस क्षेत्र में 15 से अधिक झड़पें हुई हैं।
नाटो की प्रतिक्रिया:
इस संकट के बीच, नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने ब्रुसेल्स में प्रेस वार्ता में कहा कि “यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए नाटो प्रतिबद्ध है।” उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन को जल्द ही उन्नत वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन डिटेक्शन तकनीक और सटीक मिसाइल सिस्टम मुहैया कराए जाएंगे।
अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे प्रमुख नाटो सदस्य देश यूक्रेन को रक्षा सहायता पैकेज की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें अतिरिक्त हथियार, प्रशिक्षण और सैटेलाइट इंटेलिजेंस शामिल है।
मानवीय संकट गहराया:
- 10 लाख से अधिक लोग फिर से पलायन के लिए मजबूर
- यूएन ने “इमरजेंसी रेस्पॉन्स” के लिए अपील की
- बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा रहीं
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा है कि “रूस का उद्देश्य नागरिकों को डराना और यूक्रेन को अस्थिर करना है, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे।”
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस यूक्रेन पर दबाव बनाए रखने के लिए सर्दियों से पहले अधिकाधिक क्षेत्रों पर नियंत्रण चाहता है। वहीं, पश्चिमी देशों से मिल रही मदद ने यूक्रेन को अब तक टिकाए रखा है, लेकिन युद्ध का लंबा खिंचाव मानवीय और आर्थिक संकट को और गंभीर बना सकता है।
यह संघर्ष अब केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक, मानवीय और वैश्विक स्थिरता की परीक्षा बनता जा रहा है।
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