मध्य-पूर्व तनाव से तेल की कीमतों में उछाल, रुपया बना कमजोर

इस्राइल द्वारा ईरान के नाभिकीय और सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद तेल की कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में लगभग 11 % की अचानक वृद्धि हुई, यानी $77.2 प्रति बैरल तक । इस उछाल ने जोखिम भविष्यवाणियों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ावा दिया, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 86 के स्तर के पार कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है । ब्रेंट की कीमतों में यह सबसे बड़ा दैनंदिन उछाल तीन वर्षों में माना जा रहा है। U.S. ट्रेजरी के 10-वर्षीय बॉन्ड की उपज 4.33% पर आई, जबकि सेफ-हेवन मुद्राएँ जैसे स्विस फ्रैंक और जापानी येन की मांग बढ़ी ।

विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य-पूर्व तनाव और बढ़ा तो भारत के चालू खाते और मुद्रास्फीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि हमारा तेल आयात भारी मात्रा में है । भारतीय शेयर बाजार में भी विदेशी निवेशक पृष्ठभूमि में $15.4 मिलियन इक्विटी और $296 मिलियन बांड्स की बिक्री कर चुके हैं, जो भू-राजनीतिक चिंता को दर्शाता है । यह परिस्थिति महंगाई और आर्थिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है।

इसके मद्देनज़र भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मुद्रा की स्थिरता बनाए रखने के लिए डॉलर की आक्रामक बिक्री शुरू कर दी है, जिससे रुपया और अधिक फिसलने से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो वित्त मंत्रालय को ईंधन पर सब्सिडी बढ़ाने या आयात शुल्क में राहत जैसे कदम भी उठाने पड़ सकते हैं। इसके अलावा, बढ़ते आयात बिल से विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव पड़ सकता है, जो अब तक ₹696 अरब डॉलर के आसपास बना हुआ है। उद्योग जगत और नीति निर्माता दोनों ही इस अनिश्चित स्थिति से निपटने के लिए निकट भविष्य में कड़े मौद्रिक और राजकोषीय निर्णयों की तैयारी में हैं।












Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *