नवीनतम अध्ययन बताते हैं कि दोस्तों के साथ सार्थक बातचीत तनाव और अकेलेपन को काफी हद तक कम कर देती है। अगर हम रोज़ाना किसी से खुलकर बात करें, चाहे वह सिर्फ सुनना, आभार जताना या हंसी-मजाक हो, तो मन बेहतर महसूस करता है। अमेरिकन फिजिशियन द्वारा सुझाए गए इन छोटे परामर्शों से तनाव, चिंता व अवसाद में भी कमी आती है।
सामाजिक जुड़ाव मन और शरीर दोनों की सेहत के लिए ज़रूरी है। अकेलापन व्यक्ति को गंभीर मानसिक और शारीरिक परेशानियों की ओर धकेल सकता है। अगर आप महसूस करें कि तनाव बढ़ता जा रहा है, तो किसी भरोसेमंद दोस्त से बात करना शुरू करें—यह आदत आपको मजबूत बनाएगी।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बजाय आमने-सामने की बातचीत अधिक प्रभावशाली होती है। ऐसे संवादों से ऑक्सिटोसिन जैसे “हैप्पी हार्मोन” का स्तर बढ़ता है, जिससे भावनात्मक संबंध मजबूत होते हैं और आत्म-संतुलन बनता है। नियमित सामाजिक संपर्क न केवल मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि आत्मविश्वास और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देता है।








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