RBI ने वित्तीय वर्ष 2025 में दूसरी बार ₹26,000 करोड़ के सरकारी प्रतिभूतियों के बायबैक में बड़े निवेशकों से ₹53,031 करोड़ के बोली प्राप्त किए । इसकी 99% राशि स्वीकार की गई, जो बाजार में अच्छी मांग का संकेत है।
यह कदम बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनाए रखने और निवेशकों को सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया। मार्केट विशेषज्ञ इसे मौद्रिक प्रबंधन की सशक्त रणनीति मानते हैं।
इस बायबैक ऑपरेशन के माध्यम से RBI ने बाजार में दीर्घकालिक सरकारी बांडों की मांग को भी संतुलित किया है, जिससे बांड यील्ड में स्थिरता बनी रह सके। विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की आक्रामक बायबैक रणनीति से ब्याज दरों पर दबाव कम होता है और बैंकों को अपनी बैलेंस शीट को अधिक लचीला बनाने का अवसर मिलता है। इससे दीर्घावधि में ऋण प्रवाह भी सुगम हो सकता है, जो निवेश और विकास को गति देने में मददगार साबित होगा।







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